चुनाव हार के बाद व्हाट्सएप पर निकली भड़ास: तीन मैसेज, एक ही गलती
डिस्क्लेमर : मैं स्क्रीनशॉट में दिखाए गए संदेशों की पुष्टि नहीं करती हूं |यह स्क्रीनशॉट वायरल होते होते हम तक पहुंचे हैं, हमने कोशिश की है की इसमें जगह के नाम ,भेजने वालों के नाम तथा उनके मोबाइल नंबर छुपा दिए जाएं ! मेरा इनमें से किसी के साथ भी किसी तरह का संबंध नहीं है और किसी को पर्सनली टारगेट भी नहीं किया गया है!
पंचायत चुनाव खत्म हुए कुछ ही दिन हुए हैं, पर कुछ प्रत्याशियों के व्हाट्सएप मैसेज वायरल हो रहे हैं। तीनों मैसेज अलग हैं, पर सोच एक ही - "हार के बाद की झुंझलाहट"l
आइए तीनों को एक साथ देखें और समझें कि भविष्य में चुनाव लड़ने वालों के लिए ये क्यों खतरनाक हैं।
1. पहला मैसेज: वोट गिनाकर तंज
_"एक वार्ड ने मुझे 70 वोट देकर मेरा सम्मान किया है जिसमें एक के 40 शामिल हैं... मुझे वार्ड मेंबर से भी कम आंका गया।"_
यहां गांवों के नाम लेकर वोटों का हिसाब बताया गया। यह सीधा-सीधा जनता को बांटना है। कल को लोगों में मनमुटाव हो सकता है । नेता जोड़ता है, तंज कसकर तोड़ता नहीं।
2. दूसरा मैसेज: 50 साल की मदद की धमकी
_"Very shameful... we have supported 90% of people for 40 to 50 years. But I think in future they didn't deserve help... meeting will only organize by ... members."_
यह धमकी है। "हमने मदद की, अब वोट नहीं दिया तो आगे मदद बंद।" मतलब मदद सेवा नहीं, सौदा थी। लोकतंत्र में वोट डर से नहीं, भरोसे से मिलता है। जो मदद के बदले गुलामी चाहे, उसे जनता नकार देती है।
3. तीसरा मैसेज: गाली और बदले की बात
_"Ye log dadhar hai inko to jese ko tesa... Hmara bard _______ hai ... hmare liye mater ni krti"_
शायद मैसेज भेजने वाला गद्दार लिखना चाहता था ?
यह सबसे खतरनाक है। पूरे वार्ड को गाली, विरोधियों से "जैसे को तैसा" बदला लेने की बात। एडमिन को मैसेज डिलीट करना पड़ा। जो प्रत्याशी हार के बाद जनता को ही कोसने लगे, वो जीतकर क्या करेगा?
तीनों मैसेज में एक जैसी 3 बड़ी गलतियां:
गलती नुकसान
जनता का अपमान- जिन 70 लोगों ने वोट दिया, उनका भी अपमान हुआ। भरोसा टूटता है l
समाज को बांटना - गांव, वार्ड, परिवार के नाम लेकर दरार डालना। नेता नहीं, विलेन बनते हैं l
धमकी और अहंकार - "मदद बंद", "जैसे को तैसा" - यह भाषा डराती है, वोट नहीं दिलाती l
*भविष्य में चुनाव लड़ने वालों के लिए सबक*
1. स्क्रीनशॉट अमर होते हैं : आज का गुस्सा, कल का पोस्टर बनेगा। विरोधी यही मैसेज घर-घर दिखाएंगे।
2. हार को पचाना सीखो: बड़ा नेता वही है जो हार में चुप रहे और जीत में विनम्र रहे।
3. शब्द ही चरित्र हैं: जनता आपका चेहरा भूल सकती है, पर आपके शब्द नहीं भूलती।
चुनाव 5 साल में एक दिन आता है। पर "गद्दार" और "शर्मनाक" जैसे शब्द बोलने वाले को जनता 5 साल तक याद रखती है।
गद्दार जैसा शब्द आपको मुश्किल में डाल सकता है जिसमें आपके ऊपर आईपीसी सेक्शन 499, 500 के तहत मानहानि, आईपीसी सेक्शन 504 के तहत शांति भंग करने का इरादा ,आईपीसी सेक्शन 153 ए के तहत समूह के बीच दुश्मनी, आईपीसी सेक्शन 124 ए के तहत राजद्रोह आदि का केस बन सकता है l
"Shameful" आदि शब्दों के प्रयोग में साधारण हालातों में तो सजा नहीं होती है परंतु अगर आपका इरादा सामने वाले को भड़काना सार्वजनिक जगह पर भीड़ के सामने बेइज्जत करना या हंगामा करना लगातार पीछे पड़कर बार-बार बोलना है तो यह BNS की धारा 352 के तहत आपको मुश्किल में डाल सकता है l
इसलिए अगली बार मैसेज टाइप करने से पहले एक बार सोच लेना - क्या ये शब्द मुझे नेता बनाएंगे या 5 साल के लिए घर बिठा देंगे? क्या मुझे दोबारा चुनाव प्रत्याशी के रूप में खड़े होना है या बस एक ही बार था l
क्योंकि लोकतंत्र में कुर्सी जनता देती है, और वापस भी वही लेती है।


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